IMDb’s 25 Most Popular Indian Films (2000–2025): From SRK’s Era to Saiyaara’s Success
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IMDb रिपोर्ट से पता चलता है: 25 सबसे लोकप्रिय भारतीय फ़िल्में जिन्होंने 2000-2025 को परिभाषित किया

IMDb’s 25 Most Popular Indian Films (2000–2025): From SRK’s Era to Saiyaara’s Success

IMDb’s 25 Most Popular Indian Films (2000–2025): From SRK’s Era to Saiyaara’s Success

IMDb रिपोर्ट से पता चलता है: 25 सबसे लोकप्रिय भारतीय फ़िल्में जिन्होंने 2000-2025 को परिभाषित किया

बॉलीवुड हमेशा से भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा रहा है, और इसके लोगों, राजनीति और जुनून के साथ विकसित होता रहा है। 2000 के दशक की शुरुआत के प्रवासी भारतीयों के सपनों से लेकर 2020 के दशक में दक्षिण भारतीय कहानी कहने के प्रभुत्व तक, भारतीय सिनेमा का सफ़र देश की बदलती नब्ज़ को दर्शाता है। IMDb की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ये हैं 25 सबसे लोकप्रिय भारतीय फ़िल्में जो इस सिनेमाई विकास को आकार दे रही हैं।

2000-2005: शाहरुख खान का राज
इस सहस्राब्दी की शुरुआत शाहरुख खान के निर्विवाद शासन के तहत हुई। मोहब्बतें ने अपने कलाकारों और प्रेम व विद्रोह के विषयों के साथ उस युग की शुरुआत की। इसके बाद आई "कभी खुशी कभी ग़म" ने भव्यता और भावनाओं का संगम किया और यह पीढ़ी दर पीढ़ी पसंदीदा बन गई। ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित अभिनीत देवदास ने सिनेमाई वैभव को नई परिभाषा दी, जबकि वीर-ज़ारा ने सीमा पार के रोमांस को अमर कर दिया। शाहरुख के दबदबे से अलग, अमिताभ बच्चन और रानी मुखर्जी अभिनीत संजय लीला भंसाली की एक सशक्त ड्रामा फिल्म ब्लैक थी, जिसने लचीलेपन और आशा की खोज की।

2006–2010: आमिर खान युग
जैसे-जैसे सिनेमा परिपक्व हुआ, दर्शकों को विषय-वस्तु की चाहत हुई। धूम 2 ने डकैती के चलन को हवा दी, जबकि तारे ज़मीन पर ने अपनी भावनात्मक गहराई से दिलों को छुआ। आमिर की 3 इडियट्स एक सांस्कृतिक घटना बन गई, जिसने व्यक्तित्व और शिक्षा सुधार का जश्न मनाया। दशक का समापन माई नेम इज़ खान के साथ हुआ, जिसने 9/11 के बाद की दुनिया में शाहरुख की पहचान और स्वीकृति के भावनात्मक चित्रण को चिह्नित किया।

2011–2015: बाहुबली का उदय और नई आवाज़ें
इस युग ने दोस्ती, धैर्य और भव्यता का जश्न मनाया। ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा ने यात्रा और आत्म-खोज को नई परिभाषा दी, जबकि गैंग्स ऑफ़ वासेपुर ने मुख्यधारा के सिनेमा में कच्चे यथार्थवाद का परिचय दिया। पीके ने हास्य और दिल से सामाजिक मानदंडों को चुनौती दी। फिर बाहुबली आई, जिसने भाषाई बाधाओं को तोड़ते हुए और देश भर के दर्शकों को एकजुट करते हुए - एक ऐसा मील का पत्थर जिसने अखिल भारतीय स्तर पर दक्षिण भारतीय सिनेमा के उदय को मजबूत किया।

2016–2020: टॉलीवुड का दबदबा
बाहुबली 2, केजीएफ: चैप्टर 1 और दंगल के साथ दक्षिण भारतीय सिनेमा का दबदबा रहा। उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक ने देशभक्ति को सामने लाया, जबकि दिल बेचारा सुशांत सिंह राजपूत के लिए एक मार्मिक विदाई बन गई। रोमांटिक पलायनवाद से ध्यान यथार्थवाद, साहस और वीरता की ओर स्थानांतरित हो गया।

2021–2025: महामारी और महामारी के बाद सत्ता परिवर्तन
कोविड के बाद, दर्शकों ने कच्चे, क्षेत्रीय आख्यानों को अपनाया। पुष्पा- द राइज़ और केजीएफ: चैप्टर 2 ने दक्षिण के दबदबे को जारी रखा, जबकि बॉलीवुड ने एनिमल जैसी भावनात्मक उतार-चढ़ाव भरी फ़िल्म के साथ वापसी की। 2025 में, अहान पांडे और अनीत पड्डा अभिनीत सैयारा पर सबकी नज़र रहेगी, जिसने दुनिया भर में ₹500 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की है। "छावा" और "सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी" जैसी प्रतिस्पर्धी रिलीज़ ने बॉक्स ऑफिस पर दौड़ तेज़ कर दी है, लेकिन सैयारा अब तक इस साल की सबसे लोकप्रिय फ़िल्म बनी हुई है।